नई दिल्ली(टीम फिल्टर्ड): आज कल फेसबुक और ट्विटर पर एक तस्वीर को लोगों द्वारा खूब साझा किया जा रहा है। इस इमेज में किसी मदरसे की एक कक्षा को दिखाया गया है जहां पर टीचर वहां पढ़ने वाले बच्चों हिन्दू धर्म और मुस्लिम धर्म बीच अंतर बताते हुए दिखाई दे रहें है जहां इस्लाम को हिन्दू धर्म से बेहतर बताया जा रहा है बोर्ड पर दो कॉलम बने है और हिन्दुइस्म के साथ योग, जनेऊ, मंगलसूत्र लिखा है वही इस्लाम के सामने हलाला, ख़तना और बुर्का लिखा है और इस्लाम को नंबर देकर हिन्दुइस्म से महान बताया जा रहा है।

यह फ़ोटो पिछले एक हफ़्ते में कई बार शेयर की जा चुकी है एवं इसे 2018 में भी काफ़ी वायरल किया गया था। वायरल की जा रही पोस्ट के साथ यह कैप्शन लिखा है: ‘पढाई ज़ोरो पर है, हद है यार’|

यह तस्वीर ट्विटर पर भी वायरल हो रही है।

यह पोस्ट और फ़ोटो पिछले साल भी शेयर हुआ था जिसे तारेक फ़तेह ने भी शेयर किया था हालांकि इसके फ़र्ज़ी साबित हो जाने के बाद फ़तेह ने ट्वीट डिलीट कर दिया।

Filtration(फिल्ट्रेशन)

जब हमने इस तस्वीर का रिवर्स इमेज सर्च किया तो पाया कि यह 10 अप्रैल, 2018 की एक रिपोर्ट से है जो उत्तर प्रदेश में गोरखपुर के दारुल उलूम हुसैनी नामक मदरसा का चित्रण करता है।कई समाचार संगठनों ने मूल तस्वीर के साथ रिपोर्ट की थी। उनमें से आउटलुक के एक लेख में बताया गया, “यह मदरसा आधुनिक शिक्षा का केंद्र बन गया है, जहां अरबी और अंग्रेजी के साथ संस्कृत भी पढ़ाई जाती है।” लेख में आगे बताया गया है, “इस मदरसा की विशेषता है कि संस्कृत एक मुस्लिम शिक्षक द्वारा पढ़ाई जा रही है। शायद, यह पहली बार है कि संस्कृत को मदरसा में भी पढ़ाया जा रहा है”। मूल तस्वीर नीचे देखी जा सकती है।

  इस पोस्ट में ए.एन.आई की फ़ोटो को एडिट करके वायरल किया गया है ए.एन.आई ने 9 अप्रैल 2018 को एक ट्ववीट के जरिये इस मदरसे की खूबियां बतायीं थीं। अप्रैल 2018 में ANI ने मदरसा के कुछ अन्य तस्वीरें भी ट्वीट की थी।

समान फ़ोटो आप ए.एन.आई के नीचे दिए गए वीडियो में देख सकते हैं।

निष्कर्ष

अतः वास्तव में वायरल इमेज एडिटेड है अलग अलग कोण से इस इमेज को देखने पर यह पता चलता है की मदरसे में बच्चे संस्कृत पढ़ और लिख रहे हैं ना की इस्लाम और हिन्दुइस्म का फ़र्क़।  

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