नई दिल्ली(टीम फिल्टर्ड): सोशल मीडिया में आये दिन कोई न कोई फेक न्यूज़ लोगों को गुमराह करने के लिए सामने आती रहती हैं सच का लिबाज़ ओढ़े इन फ़र्ज़ी ख़बरों के जाल को तो इस बार बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन भी न समझ सके और वो खुद ही एक फेक न्यूज़ अपने ऑफिसियल ट्विटर हैंडल से शेयर कर बैठे।

दरअसल सोशल मीडिया पर एक 59 सेकंड का वीडियो खूब वायरल हो रहा है इस वीडियो में दावा किया जा रहा है कि NASA ने बारिश वाले बादल बनाने की मशीन विकसित की है जिसकी मदद से बारिश करवाई जा सकती है। इस वीडियो ट्विटर यूजर जयश्री विजयन ने इस वीडियो को 26 जून को शेयर किया था। जिसे बॉलीवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन ने भी रीट्वीट किया है।

उन्होंने लिखा, “क्या एक भारत में भी मिल सकता है। मेरा मतलब है अभी.. इसी वक्त.. प्लीज”

वायरल वीडियो के शुरुआत में कुछ सेकंड तक एक विशालकाय मशीन बादलों जैसा दिखने वाला सफेद रंग का धुआं छोड़ती हुई दिखाई देती है। वहीं आगे चल कर इस वीडियो में एक एंकर नजर आता है जो इन कथित बादलों के बारे में बात करता है। 59 सेकंड के इस वीडियो के अंत में इन्हीं ‘बादलों’ से बारिश होती हुई भी दिखती है।

बिग बी के रीट्वीट के बाद अन्य यूजर्स ने भी इसे शेयर किया है। 

Filtration(फिल्ट्रेशन)

हमने अपनी पड़ताल में पाया कि वायरल हो रहा वीडियो भ्रामक है। इसे दो अलग-अलग रॉकेट इंजन के परीक्षण के वीडियो को जोड़कर तैयार किया गया है। नासा ने कृत्रिम बारिश करवाने वाली कोई मशीन तैयार नहीं की है। वायरल वीडियों में दिखाई दे रही बीबीसी के लोगो वाली फुटेज इसी चैनल पर आने वाले प्रोग्राम टॉप गियर की है। वीडियो में दिखाई दे रहे एंकर मशहूर पत्रकार और लेखक जेरेमी क्लार्कसन है। उन्होंने 2002 से लेकर 2015 तक बीबीसी चैनल पर आने वाले कार्यक्रम टॉप गियर को होस्ट किया है। 

वीडियो के शुरुआती कुछ सेकंड में RS-25 इंजन के परीक्षण की क्लिप है जबकि बाकी का वीडियो बीबीसी की टीवी सीरीज “स्पीड” का है। 2001 में प्रसारित हुए इस शो को इंग्लिश ब्रॉडकास्टर जेरेमी क्लार्कसन ने होस्ट किया था। फुटेज में RS-68 इंजन का परीक्षण देखा जा सकता है। नासा ने इन दोनों ही इंजन का परीक्षण अलग-अलग समय पर मिसिसिपी में स्थित अपने स्टेनिस स्पेस सेंटर में किया था। यह वीडियो इससे पहले भी वायरल हो चुका है। उस समय The Verge ने इसका फैक्ट चेक किया था।

डेली मेल ऑनलाइन ने 20 अक्टूबर 2017 को इस टेस्टिंग की खबर पब्लिश की है। इस खबर में वायरल वीडियो के एक शॉट की तस्वीर देखी जा सकती है।

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स्क्रीनशॉट

वायरल वीडियो का दूसरा हिस्सा टॉप गियर शो के एक एपिसोड से लिया गया है। यहां देखें बीबीसी के शो “स्पीड” की क्लिपिंग जहां से वायरल वीडियो का हिस्सा लिया गया है-

क्या कृत्रिम रूप से कराई जा सकती है बारिश?

क्लाउड-सीडिंग एक ऐसी प्रक्रिया है जिसकी मदद से सीमित इलाके में कृत्रिम बारिश करवाई जा सकती है। इसके तहत ड्राय आइस जैसे केमिकल्स का छिड़काव पानी वाले बादलों पर किया जाता है, जिससे बारिश होती है। इस प्रक्रिया ने काफी हद तक सफलता प्राप्त की है, लेकिन बारिश करवाने का यह तरीका काफी महंगा है।

भारत सहित कई देशों में क्लाउड सीडिंग तकनीक को आजमाया जा रहा है। वर्ष 2017 में इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मेटेरोलॉजी ने कर्नाटक में क्लाउड-सीडिंग की थी। इसे “वर्षाधारे” नाम दिया गया था। शोध के अनुसार क्लाउड सीडिंग की मदद से केवल तब ही बारिश करवाई जा सकती है जब मौसम इसके अनुकूल हो।

निष्कर्ष

अतः हमारी पड़ताल से यह स्पष्ट है की कि वायरल वीडियो नासा द्वारा 2017 में रॉकेट RS-25 के इंजन की टेस्टिंग और 2010 में स्पेस शटल रॉकेट बूस्टर की टेस्टिंग के वीडियोज को जोड़कर बनाया गया है। नासा द्वारा बारिश के लिए कृत्रिम बादल बनाने वाले इंजन के निर्माण का दावा फर्जी है। 

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